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आज का शब्द- इंदुमती और नागार्जुन की सुप्रसिद्ध कविता: कालिदास ! सच-सच बतलाना ! 

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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कालिदास ! सच-सच बतलाना 
इन्दुमती के मृत्युशोक से 
अज रोया या तुम रोये थे? 
कालिदास ! सच-सच बतलाना ! 
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शिवजी की तीसरी आँख से 
निकली हुई महाज्वाला में 
घृत-मिश्रित सूखी समिधा-सम 
कामदेव जब भस्म हो गया 
रति का क्रंदन सुन आँसू से 
तुमने ही तो दृग धोये थे 
कालिदास ! सच-सच बतलाना 
रति रोयी या तुम रोये थे? 

वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिका 
प्रथम दिवस आषाढ़ मास का 
देख गगन में श्याम घन-घटा 
विधुर यक्ष का मन जब उचटा 
खड़े-खड़े तब हाथ जोड़कर 
चित्रकूट से सुभग शिखर पर 
उस बेचारे ने भेजा था 
जिनके ही द्वारा संदेशा 
उन पुष्करावर्त मेघों का 
साथी बनकर उड़ने वाले 
कालिदास! सच-सच बतलाना 

पर पीड़ा से पूर-पूर हो 
थक-थककर औ' चूर-चूर हो 
अमल-धवल गिरि के शिखरों पर 
प्रियवर ! तुम कब तक सोये थे? 
रोया यक्ष कि तुम रोये थे ! 

कालिदास ! सच-सच बतलाना !
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