विज्ञापन

World Sparrow Day: कृष्ण कुमार यादव की कविता 'गौरैया, जो हर आँगन में घोंसला लगाया करती'

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

चाय की चुस्कियों के बीच


सुबह का अख़बार पढ़ रहा था
अचानक
नज़रें ठिठक गईं
गौरैया शीघ्र ही विलुप्त पक्षियों में ।

वही गौरैया,
जो हर आँगन में
घोंसला लगाया करती
जिसकी फुदक के साथ
हम बड़े हुए।

क्या हमारे बच्चे
इस प्यारी व नन्हीं-सी चिड़िया को
देखने से वंचित रह जाएँगे!
न जाने कितने ही सवाल
दिमाग में उमड़ने लगे ।



बाहर देखा
कंक्रीटों का शहर नज़र आया
पेड़ों का नामो-निशाँ तक नहीं
अब तो लोग घरों में
आँगन भी नहीं बनवाते
एक कमरे के फ्लैट में
चार प्राणी ठुँसे पड़े हैं ।

बच्चे प्रकृति को
निहारना तो दूर
हर कुछ इण्टरनेट पर ही
खंगालना चाहते हैं ।

आख़िर
इन सबके बीच
गौरैया कहाँ से आएगी ?
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

TATA VENKAT SRINIVAS

29 कविताएं

View Profile