1-
जब बोलो तो
ध्यान रखो !
किसी के सम्मुख बोल रहे हो ।
ग़ैरहाज़िरों को भी हाज़िर समझो ।
याद रखो !
मरे और बिछड़े हुए भी
दूर कहीं सुनते हैं हमें ।
दूर कहीं सुनते हैं वे भी
जो बनेंगे हमारे वारिस ।
जब बोलो
तो याद रखो !
यह सब किसी गुप्त ग्रन्थ में लिखा होगा
जब बोलो
तो केवल कण्ठ से ही न बोलो
दिल से बोलो ।
और जब लगे
कि होंठों से हृदय का रिश्ता टूट गया है,
तो मौन हो जाओ ।
पंजाबी से अनुवाद : योजना रावत
मैं पहली पंक्ति लिखता हूँ और डर जाता हूँ
2-
मैं पहली पंक्ति लिखता हूँ
और डर जाता हूँ राजा के सिपाहियों से
पंक्ति काट देता हूँ
मैं दूसरी पंक्ति लिखता हूँ
और डर जाता हूँ बाग़ी गुरिल्लों से
पंक्ति काट देता हूँ
मैंने अपने प्राणों की ख़ातिर
अपनी हज़ारों पंक्तियों को
ऐसे ही क़त्ल किया है
उन पंक्तियों की आत्माएँ
अक्सर मेरे आसपास ही रहती हैं
और मुझे कहती हैं :
कवि साहिब !
कवि हैं या कविता के क़ातिल हैं आप ?
सुना कि मुंसिफ़ बहुत से होते हैं
इनसाफ़ के क़ातिल
बड़े धर्म के रखवाले
ख़ुद धर्म की पवित्र आत्मा को
क़त्ल करने वाले लोगों के बारे में भी सुना था,
सिर्फ़ यही सुनना बाक़ी था
कि हमारे वक़्त में ख़ौफ़ के मारे
कवि भी बन गए
कविता के हत्यारे ।
11 महीने पहले