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Hindi Kavita: सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता 'हंसा ज़ोर से जब'

काव्य डेस्क

Kavita
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हंसा ज़ोर से जब, तब दुनिया

बोली इसका पेट भरा है

और फूट कर रोया जब
तब बोली नाटक है नखरा है

जब गुमसुम रह गया, लगाई
तब उसने तोहमत घमंड की
कभी नहीं वह समझी इसके
भीतर कितना दर्द भरा है

दोस्त कठिन है यहां किसी को भी
अपनी पीड़ा समझाना
दर्द उठे तो, सूने पथ पर
पांव बढ़ाना, चलते जाना 

2 वर्ष पहले
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