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Hindi Poetry: राष्ट्रधर्म अपनाना होगा

काव्य डेस्क

Kavita
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                             हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
        
                                                    
                            
से ऊपर आना होगा।
 
सत्य, अहिंसा, प्रेम के दीपक
दिल में तुम्हें जलाना होगा,
मजहब की सलाखों की कैद से
बाहर तुमको आना होगा।
 
नवनिर्माण, नवविकास के गीतों को
फिर से तुमको गाना होगा,
आर्यावर्त को विश्व का सिरमौर
फिर से तुमको बनाना होगा।
आजादी के संकल्पों को
फिर से तुमको दोहराना होगा,
शोषित, पीड़ित, वंचित के पक्ष में
तुमको आगे आना होगा।
 
इस धरती के कण-कण को,
माथे से तुम्हें लगाना होगा,
गीत मिलन के और प्यार के,
फिर से तुमको गाना होगा।
 
नफरत और विद्वेष भाव को
मन से दूर भगाना होगा,
रामराज्य को इस पावन धरा पर,
फिर से तुमको लाना होगा। 

- राकेशधर द्विवेदी


 
एक महीने पहले
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