विज्ञापन

राकेश धर द्विवेदी: मैं गीत बन अधरों पर आऊँगा

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            मैं गीत बन अधरों पर आऊँगा। 
        
                                                    
                            

ये चाँद तारे नील गगन में
कुछ गीत प्यारे गुनगुनाते हैं
ये गीत कुछ और नहीं बस
तेरी मेरी कहानी सुनाते हैं

उस कहानी को सुनते-सुनते
फिर ये भावुक मन फिर रोया है
अधर तो कुछ सुना न सके
पर नयनों ने सब कुछ बोला है

इन नयनों की भाषा को पढ़ तुम
मेरे आँगन में आ जाओ
सूनी पड़ी दिल की बगिया में
रातरानी बनकर बिखर जाओ

तुम्हारे संग जो पल हैं गुजारे
मैं उसे भुला ना पाऊंगा
तुम छन्दों में बस जाओ
मैं गीत बन अधरों पर आऊँगा। 

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nidhhi Mukesh

22 कविताएं

View Profile

Sarthak Piyush

28 कविताएं

View Profile