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फणीश्वरनाथ रेणु की कविता- कौन तुम वीणा बजाते?

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  कौन तुम वीणा बजाते? 
कौन उर की तंत्रियों पर 
तुम अनश्वर गान गाते?... 

सुन रहा है यह मन अचंचल 
प्रिय तुम्हारा स्वर मनोहर 
विश्वमोहन रागिनी से 
प्राणदायक द्रव रहा झर 
ध्यान हो तन्मय बनाते 
सकल मन के दु:ख नसाते 
कौन तुम विष-वासना को 
प्रेममय अमृत पिलाते? 
कौन तुम वीणा बजाते? 
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बन गए वरदान— 
जीवन के सकल अभिशाप तुझको! 
आत्म-कल्याणी बने दु:ख,— 
वेदना, परिताप मुझको! 
तुम ‘अहं’ को हो बुलाते 
‘द्वैत’ जीवन का मिटाते 
कौन तुम अमरत्व का 
संदेश हो प्रतिपल सुनाते! 
कौन तुम वीणा बजाते? 

3 वर्ष पहले
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