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फणीश्वरनाथ रेणु की कविता- कौन तुम वीणा बजाते?

कविता
                
                                                         
                            कौन तुम वीणा बजाते? 
                                                                 
                            
कौन उर की तंत्रियों पर 
तुम अनश्वर गान गाते?... 

सुन रहा है यह मन अचंचल 
प्रिय तुम्हारा स्वर मनोहर 
विश्वमोहन रागिनी से 
प्राणदायक द्रव रहा झर 
ध्यान हो तन्मय बनाते 
सकल मन के दु:ख नसाते 
कौन तुम विष-वासना को 
प्रेममय अमृत पिलाते? 
कौन तुम वीणा बजाते?  आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

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