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महादेवी वर्मा: इस कविता से जानिए कि आख़िर क्यूं भोले हैं ठाकुर जी

काव्य डेस्क

Kavita
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ठंडे पानी से नहलातीं,
ठंडा चंदन इन्हें लगातीं,
इनका भोग हम
                                    
                                                                        
                            


ठंडे पानी से नहलातीं,
ठंडा चंदन इन्हें लगातीं,
इनका भोग हमें दे जातीं,
फिर भी कभी नहीं बोले हैं।
माँ के ठाकुर जी भोले हैं। 

एक वर्ष पहले
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