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हरिवंशराय बच्चन: आँख मूँद लेने से पहले, आ, जो कुछ कहना कह डालें

काव्य डेस्क

Kavita
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आ, सोने से पहले गा लें!

जग में प्रात पुनः आएगा,
सोया जाग नहीं पाएगा,
आँख मूँद लेने से पहले, आ, जो कुछ कहना कह डालें!
आ, सोने से पहले गा लें!

दिन में पथ पर था उजियाला,
फैली थी किरणों की माला
अब अँधियाला देश मिला है, आ, रागों का दीप जला लें!
आ, सोने से पहले गा लें!

काल-प्रहारों से उच्छृंखल,
जीवन की लड़ियाँ विशृंखल,
इन्हें जोड़ने को, आ, अपने गीतों की हम गाँठ लगा लें!
आ, सोने से पहले गा लें!
 
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3 महीने पहले
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