विज्ञापन

ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तन्हाई भी - गुलज़ार

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी


ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तन्हाई भी

यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
कितनी सौंधी लगती है तब माज़ी की रुसवाई भी

दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में
मेरे साथ चला आया है आपका इक सौदाई भी

ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी है
उन की बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7409 कविताएं

View Profile