बड़े प्यार से मिलना सबसे
दुनिया में इन्सान रे
क्या जाने किस भेस में बाबा मिल जाए भगवान रे
कौन बड़ा है कौन है छोटा
ऊँचा कौन और नीचा
प्रेम के जल से सभी को सीचा यह है प्रभु का बग़ीचा
मत खींचों तुम दीवारें
इन्सानों के दरमियान रे
ओ महंत जी
तुम महंत जी खोज रहे उन्हें मोती की लड़ियों में
प्रभु को मोती की लड़ियों में
कभी उन्हें ढूंढा क्या ग़रीबों की अंतड़ियों में
दीन जनों के अंसुवन में
क्या कभी किया है स्नान रे
क्या जाने किस भेस में ...
क्या जाने कब श्याम मुरारी आ जावे बन कर के भिखारी
लौट न जाए कभी द्वार से
बिना लिए कुछ दान रे