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Arun Kamal Poetry: सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार

काव्य डेस्क

Kavita
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                            कौन बचा है जिसके आगे 
        
                                                    
                            
इन हाथों को नहीं पसारा 

यह अनाज जो बदल रक्त में 
टहल रहा है तन के कोने-कोने 
यह क़मीज़ जो ढाल बनी है 
बारिश सर्दी लू में 
सब उधार का, माँगा-चाहा 
नमक-तेल, हींग-हल्दी तक 
सब क़र्ज़े का 
यह शरीर भी उनका बंधक 

अपना क्या है इस जीवन में 
सब तो लिया उधार 
सारा लोहा उन लोगों का 
अपनी केवल धार। 
 
2 वर्ष पहले
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