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अलका 'सोनी' की कविता: गुलाब 

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  अगर बनूँ मैं
गुलाब, तो तेरे
आंगन में ही 
खिलना चाहूँ,

हरपल रहकर साथ 
तुम्हारे, 
देख तुम्हें मुस्काऊं
कांटों से घिरकर भी
छोड़ कहीं न जाऊं,
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दुःख में रहूं 
मैं साथ तुम्हारे,
सुख में तेरे संग मुस्काऊं,
मुरझा जाए जब
तरुणाई, कोई खुशबू
मैं लुटा न पाऊं
झड़ जाऊं जब 
शाखों से अपनी ,

तब रख लेना
तुम मुझको
अपनी कोई चिठ्ठी में,
या बिखेर देना 
मुझको अपनी बगिया की
मिट्टी में....
4 वर्ष पहले
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