विज्ञापन

लोग मुझे पागल कहते हैं गलियों में बाज़ारों में: नक्श लायलपुरी

काव्य डेस्क

Irshaad
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            लोग मुझे पागल कहते हैं गलियों में बाज़ारों में
        
                                                    
                            
मैंने प्यार किया है मुझको चुनवा दो दीवारों में

जाने कितनी नदियों को धनवान बनाया झरनों ने,
चाँदी जैसी लहरें गिरती देखी हैं कोहसारों में

गीत है या फ़रियाद किसी की, नग़मा है या दिल की तड़प
इतना दर्द कहाँ से आया साज़ों की झंकारों में

हर पनघट पर मेरे फ़साने, चौपालों पर ज़िक्र मेरा
मेरी ही बातें होती हैं बस्ती के चौबारों में

काँप उठे हैं शाहों के दिल, महलों की बुनियाद हिली,
इश्क़ ने जब जब रक़्स किया है शाहों के दरबारों में

सब का दिल हो अपने जैसा अनहोनी सी बात लगे,
’नक़्श’ यह क्या सोचा करते हो बैठ के अपने यारों में
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjai kumar

103 कविताएं

View Profile