नज़ीर अकबराबादी: गणेश जी की स्तुति
अव्वल तो दिल में कीजिए पूजन गनेश जी।
स्तुति भी फिर बखानिए धन-धन गनेश जी।
भक्तों को अपने देते हैं दर्शन गनेश जी।
वरदान बख़्शते हैं जो देवन गनेश जी।
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ अन-धन गनेश जी॥1॥
माथे पै अर्द्ध चन्द्र की शोभा, मैं क्या कहूं।
उपमा नहीं बने है मैं चुपका ही हो रहूं।
उस छवि को देख देख के आनन्द सुख लहूं।
लैलो निहार दिल में सदा अपने वो जपूं।
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ अन-धन गनेश जी॥2॥
इक दन्त को जो देखा किया खू़ब है बहार।
इस पै हज़ार चन्द की शोभा को डालूँ वार।
इनके गुणानुवाद का है कुछ नहीं शुमार।
हर वक्त दिल में आता है अपने यही विचार।
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि औ अन-धन गनेश जी॥3॥
गजमुख को देख होता है सुख उर में आन-आन।
दिल शाद-शाद होता है मैं क्या करूं बखान।
इल्मो हुनर में एक हैं और बुद्धि के निधान।
सब काम छोड़ प्यारे रख मन में यही आन।
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥4॥
क्या छोटे-छोटे हाथ हैं चारों भले-भले।
चारों में चार हैं जो पदारथ खरे-खरे।
देते हैं अपने दासों को जो हैं बड़े-बड़े
अलबत्ता अपनी मेहर यह सब पर करें-करें।
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥5॥
इक दस्त में तो हैगा यह सुमिरन बहार दार?
और दूसरे में फर्सी अजब क्या है उसकी धार?
तीजे में कंज चौथे कर में हैं लिए अहार?
मत सोच दिल में और तू ऐ यार बार-बार॥
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥6॥
अच्छे विशाल नैन हैं और तोंद है बड़ी।
हाथों को जोड़ सरस्वती हैं सामने खड़ी॥
होवे असान पल में ही मुश्किल है जो अड़ी।
फल पावने की इनसे तो है भी यही घड़ी॥
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥7॥
मूसा सवारी को है अजब ख़ूब बेनजीर।
क्या खूब कान पंजे हैं और दुम है दिल पजीर॥
खाते हैं मोती चूर कि चंचल बड़ा शरीर।
दुख दर्द को हरे हैं तो दिल को बधावें धीर॥
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥8॥
घी में मिला के कोई जो चढ़ाता है आ सिन्दूर।
सब पाप उसके डालता कर दम के बीच चूर॥
फूल और विरंच शीश पै दीपक को रख कपूर।
जो मन में होवे इच्छा तो फिर क्या है उससे दूर॥
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥9॥
जुन्नार है गले में एक नाग जो काला।
फूलों के हार डहडहे और मोती की माला॥
वह हैंगे अजब आन से शिव गौरी के लाला।
सुर नर मुनि भी कहते हैं वो दीन दयाला॥
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥10॥
सनकादि सूर्य चन्द्र खड़े आरती करें।
और शेषनाग गंध की ले धूप को धरें॥
नारद बजावें बीन चँवर इन्द्र ले ढरें।
चारों बदन से स्तुति ब्रह्मा जी उच्चरें॥
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥11।
जंगम अतीत जोगी जती ध्यान लगावें।
सुर नर मुनीश सिद्ध सदा सिद्धि को पावें॥
और संत सुजन चरन की रज शीश चढ़ावें।
वेदों पुरान ग्रंथ जो गुन गाय सुनावें॥
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥12॥
जो जो शरन में आया है कीन्हा उसे सनाथ।
भव सिन्धु से उतारा है दम में पकड़ के हाथ।
यह दिल में ठान अपने और छोड़ सबका साथ।
तू भी ‘नज़ीर’ चरणों में अपना झुका के माथ।
हर आन ध्यान कीजिए सुमिरन गनेश जी।
देवेंगे रिद्धि सिद्धि और अन-धन गनेश जी॥13॥
- नज़ीर अकबराबादी
साभार - कविता कोश
वक्रतुण्ड महाकाय, इस महामंत्र से गणेश जी की स्तुति
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा
इस महामंत्र से गणेश जी की स्तुति कर रहे हैं मशहूर गायक शंकर महादेवन।
गणेश जी की वंदना कर रहे शंकर महादेवन का यूट्यूब पर मौजूद वीडियो यहां देखें और भक्ति में लीन हो जाएं -
शंकर महादेवन ने 'तुतारी सॉन्ग' से की गणेश वंदना
भगवान गणेश की वंदना हम कई तरह से करते हैं।
भजन, कविता या फ़िल्मी नग़में हों।
मशहूर गायक और संगीतकार शंकर महादेवन ने कुछ ख़ास तरह से गणेश जी की वंदना की है।
टी-सीरीज के सौजन्य से यूट्यूब पर मौजदू इस वीडियो में देखें गणेश जी की स्तुति करते शंकर महादेवन को -
इस गणेश स्तुति में भक्ति का परमानंद
गजाननं गजवदनं गणपति प्रणमाम्यहं।
इस गणेश स्तुति से भक्ति रस के सागर में गोते लगाएं
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥
भगवान गणेश की स्तुति पर कई भजन हैं। गणेश जी की महिमा का बखान हम कई स्तुतियों से करते हैं।
शंकर महादेवन की मधुर और भक्तिमय आवाज़ में गणेश जी की इस स्तुति को यूट्यूब पर मौजूद इस वीडियो में यहां सुनें -
'महागणपतिम' फ्यूज़न संगीत शैली की ये स्तुति रूह में समा जाएगी
महागणपतिम
दक्षिण भारतीय कवि और संगीतकार मुथुस्वामी दीक्षितार ने 200 साल पहले 'महागणपतिम' लिख कर गणेश जी की स्तुति की थी।
200 साल पुरानी इस क्लासिक गणेश वंदना का आज के दौर के मुताबिक़ एक कार्नेटिक फ़्यूजन संगीत तैयार किया गया है।
शंकर महादेवन ने भगवान गणेश की स्तुति को कुछ इस तरह से गाया है कि उनकी आवाज़ रूह में समा जाती है।
गणेश जी की स्तुति 'महागणपतिम' का वीडियो देखें -
शास्त्री नित्यगोपाल कटारे : गणपति बब्बा आइयो
गणपति बब्बा आइयो
गणपति बब्बा अइयो ऋ़द्धि सिद्धि लइयो।
इते परो बुद्धि को टोटा सद्बुद्धि लेतैयो।
वायुयान सुरक्षित नइहां बा में सफर मती करियो
रोड हो गये उबड़ खाबड़ बस में पाँव नहीं धरियो
मूषा छोड़ कबहुँ धोखे से रेल में मत चढ़ जइयो।।
गणपति बब्बा अइयो ऋ़द्धि सिद्धि लइयो।
करियो मती अबेर तनिक दिनछित मुकाम पे आजइयो
बिजली को कछु नहीं ठिकानो मती भरोसे में रहियो
बीच सड़क में खुदी तलैंयें कींच में मत धस जइयो
गणपति बब्बा अइयो ऋ़द्धि सिद्धि लइयो।
अबकी साल पढान गुरु जी कक्षा में नहिं आ रहे हैं
घर-घर घूमत फिरें गाँव में वोटर लिस्ट बना रहे हैं
आये परीक्षा सपने में पेपर आउट कर दइयो
गणपति बब्बा अइयो ऋ़द्धि सिद्धि लइयो।
हो रहे अबहिं चुनाव सबइर अपनी-अपनी चिल्ला रहे हैं
आश्वासन वादों के मन के लड्डू खूब खिला रहें हैं
बचके रहियेगा तुम चुनाव को चिन्ह मती बन जइयो।।
गणपति बब्बा अइयो ऋ़द्धि सिद्धि लइयो।
नकली भगत तुम्हारे तुमको गोदी में बैठा लेंगे
कंधों पर ले ले के तुमको सारो शहर घुमा देंगे
मोदी और बघेला के चक्कर में मत पड़ जइयो।।
गणपति बब्बा अइयो ऋ़द्धि सिद्धि लइयो।
सबरो दूध गाँव को बाबू व्यर्थ चाय में खो रहे हैं
खाके तेल मिलावट बारो हम सब कांटे हो रहे हैं
तुम्हहिं उते से कामधेनु को देशी घी लेत अइयो।।
गणपति बब्बा अइयो ऋ़द्धि सिद्धि लइयो।
निर्भय हो बंदूकें लेके घूम रहे हैं हत्यारे
भये अनाथ कई मोड़ा-मोड़ी भटक रहे मारे-मारे
तुम आतंकवादियों की अब खाल में भुस भर दैयो।।
गणपति बब्बा अइयो ऋ़द्धि सिद्धि लइयो।
पैसा बारे तुम्हें बतेंहैं सोना चाँदी और मेवा
हम फट्टी पे बैठन वारे का कर पाएँगे सेवा
तुम महलों को मेवा तजके साग हमारो खइयो।।
गणपति बब्बा अइयो ऋद्धि सिद्धि लइयो।
- शास्त्री नित्यगोपाल कटारे
साभार - कविता कोश
गणपति बप्पा की जय बोलो
जय बोलो जय बोलो
गणपति बप्पा की जय बोलो।
सिद्ध विनायक संकट हारी
विघ्नेश्वर शुभ मंगलकारी
सबके प्रिय सबके हितकारी
द्वार दया का खोलो
जय बोलो जय बोलो
पार्वती के राज दुलारे
शिवजी की आंखों के तारे
गणपति बप्पा प्यारे प्यारे
द्वार दया का खोलो
जय बोलो जय बोलो।
शंकर पूत भवानी जाये
गणपति तुम सबके मन भाये
तुमने सबके कष्ट मिटाये
द्वार दया का खोलो
जय बोलो जयबोलो
जो भी द्वार तुम्हारे आता
खाली हाथ कभी ना जाता
तू है सबका भाग्य विधाता
द्वार दया का खोलो
जय बोलो जय बोलो
गणपति बप्पा की जय बोलो
साभार - कविता कोश
जय हो गणेश
जय हो गनेश, प्रथम तुमका मनाय लेई,
कारज के सारे ही विघ्न टल जायेंगे!
नाहीं तो देवन के दफ़्तर में गुजर नहीं,
तुमका मनाय सारे काज सर जायेंगे!
सारे पत्र-बंधन के तुम ही भँडारी हो,
हमरे निवेदन को पत्र तुम करो सही,
हमसों पुजापा लेइ आगे बढ़ाय देओ!
बाबू हैं गनेस, तिन्हें पूज लेओ पहले ई!
दस चढ़ाय देओ, ई हजार बनवाय दिंगे
कलम की मार बड़े-बड़े नाचि जायँगे,
उदर बिसाल सब चढ़ावा समाय लिंगे
इनकी किरपा से सारे संकट कटि जाहिंगे!
कहूँ जाओ द्वारे पे बैठे मिलि जावत हैं,
देखत रहत कौन, काहे इहाँ आयो है!
कायदा कनून तो जीभै पे धर्यो है पूरो!
नाक बड़ी लंबी, सूँघ लेत सब उपायो हैं
चाहे लिखवार, तबै लिखन बैठ जाइत हैं
क्लर्की निभात बड़े बाबू पद पायो है
वाह रे गनेस, तोरी महिमा अपार
आज तक किसउ से जौन बुद्धि में न हार्यो है!
विधना के दफ़्तर के इहै बड़े बाबू हैं
पूजै प्रथम बिना तो काजै न होयगो
सारी ही लिखा-पढ़ी इनही के हाथ
जौन उनते बिगार करे जार-जार रोयगो!
हाथन में लडुआ धरो, पत्र-पुस्प अर्पन करो,
सुख से निचिंत ह्वैके जियो जिय खोल के
पहुँचवारे पूत, रुद्र और चण्डिका के है जे,
इनके गुन गान करो, सदा जय बोल के!
- प्रतिभा सक्सेना
साभार - कविता कोश
हर हाल गजानन साथ मेरे
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।
हर युग में सदा, हर काल सदा
कण-कण शुभता का भाव भरे
हर हाल गजानन साथ मेरे
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।
जनम के पाप मेरे
तू सत्कर्मों से दूर करे
जन्मों का बिगड़ा भाग्य मेरा
तू पल भर में सौभाग्य भरे
हर हाल गजानन साथ मेरे
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।
हे गणनायक, सिद्धविनायक
मेरे सब संताप हरे
भक्ति-भाव भर मेरे अंतर
मन का तम, पलभर में हरे
हर हाल गजानन साथ मेरे
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।
गौरी-पुत्र के संग शारदा
माँ कमला भी साथ रहे
शिवशक्ति वरदान है तुझको
जग का सदा कल्याण करे
हर हाल गजानन साथ मेरे
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।
तुझको आज मनाते भगवन
हम-सब तेरे द्वार खड़े
दर्शन दे दे आज गजानन
तू ही अब कल्याण करे
हर हाल गजानन साथ मेरे
हर दुःख का निवारण हाथ तेरे।
- 'सनातन' कैलाश यादव
साभार - रचनाकार