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ये हैं हिंदी दिवस पर हमारे पाठकों की टॉप 5 यूजीसी...

काव्य डेस्क

Irshaad
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                                                  हिंदी दिवस पर हमारे पाठकों ने मेरे अल्फाज सेक्शन के तहत हिंदी पर अपने दिलों के भाव व्यक्त किए हैं। सरल और गहरे शब्दों के साथ हिंदी पर कुछ चुनिंदा पाठकों के ये विचार हम सभी पाठकों के समक्ष रख रहे हैं।

अपने ही घर के एक कोने में
बरसों से उपेक्षित
हीन भावना से ग्रस्त
अपनों की सताई हुई मैं
ख़ामोश बैठी खून के आंसू रो रही हूं
मृतप्राय सी हूं मैं
सिर्फ आती जाती सांस ये याद दिलाती है के
मैं जिंदा हूं
मेरे चारों तरफ उदासी है, मायूसी है
मेरे वजूद को छोटा समझते हैं
मेरे अपने......
मेरे स्वरूप को विकृत कर देने वाले भी वही है
मेरे साथ चलना, मेरा हाथ थामना
उनकी शान के खिलाफ है
अपनों के बंधनों में जकड़ी हुई मैं
आज बिल्कुल विवश हूं
इतना अपमान सहकर भी ख़ामोश हूं
जानते हैं क्यों ?
प्रतिशोध लेना मेरा स्वभाव नहीं है
वो भी अपनों से
नहीं.......
मैं तो उस दिन की बाट जोहती हूं
जब मेरे घर में मुझे सम्मान मिलेगा
मेरा खोया हुआ आदर-मान मिलेगा
मेहमानों काल आदर तो होगा
पर अपनों काल निरादर नहीं होगा
पर न जाने वो दिन कब आएगा
उस दिन की राह में पलकें बिछाए
जानते हैं आप मैं कौन हूं ?
मैं हूं अपनों से उपेक्षित , तिरस्कृत
अपने हक की लालसा में चिरप्रतिक्षित.....
अपने गुमशुदा अधिकार की है जिसे अभिलाषा
अपने ही जिसके देख रहे हैं जिसकी बरबादी का तमाशा
मैं हूं वो व्याकुल,आहत राष्ट्रभाषा.....

-निशा अग्रवाल
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हिंदी की बात निराली

"हिंदी-दिवस तुम्हें प्रणाम"
हिंदी की बात निराली
युगों पहले संस्कृत से जन्मी पाली
रूप बदलती अपभ्रंश बनी
ब्रज की बोली और अवधी
से अलग होती हुई आखिर
खड़ी बोली हिंदी बनी
गद्य को निखारती संवारती
पद्य में निर्झर-सरिता सी बह चली

हिमाद्रि तुंग-श्रृंग से [प्रसाद] से निकल
सुख-दुःख के मधुर मिलन से [पंत]
तुम्हारा प्रण उठे निखर [द्विवेदी]
उसका की जो ऋषि भूमि हैं [गुप्त ]
क्रंदन में आहत विश्व हंसा [महादेवी]
घूंट आंसुओं के पीकर रह जाते [निराला]
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाये [नीरज]
मैं लौटूंगा...कदम मिला कर चलना होगा[अटलजी]

हिंदी में निखार आया
आया नौ-यौवन
चारों दिशाओं में
बसंत बहार सा खिला
नव-रंग,ताल-छंद से
सारे विश्व को विभोर कर उठा
हिंदी की नव-गाथा
चलता रहे अविराम
हिंदी-दिवस तुम्हें प्रणाम

"मन."[बावरी]
 

English से मैं परेशान...

हिंदी मेरी जान,
English से मैं परेशान।
हिंदी साथ छोड़ती नहीं,
English साथ दौड़ती नहीं।
हिंदी दिल चुरा ले,
English बेइज़्ज़त करा दे।
हिंदी मुझे जानती है,
English मुझे पराया मानती है।
हिंदी जादुई छड़ी,
English काली परी।
हिंदी मेरी मुस्कान है,
English मुझसे अनजान हैं।
हिंदी मेरी शान है,
English में घोर अभिमान है।
हिंदी मेरे लिए तोहफा है,
English मेरे लिए तौबा है।
हिंदी मेरी मातृ-भाषा है,
English बस तमाशा है।
हिंदी मेरी आशा है,
English से मुझे निराशा है।
हिंदी मेरी ज़िंदगी है,
इंग्लिश मेरी बंदगी है।

मनप्रीत गाबा

 

प्यार हिंदी में करूँगा...

उर्दू में

मुहब्बत ना करूँगा

अंग्रेजी में

लव ना कहूँगा

मैं तो जब भी करूँगा

प्यार हिंदी में करूँगा

ना उर्दू में

निकाह पढ़वाऊँ

ना अंग्रेजी में

मैरिज करवाऊँ

मैं तो जब भी करवाऊँगा

विवाह हिंदी में करवाऊँगा

उर्दू में

ना कोई फ़र्ज़ करुँगा

अंग्रेजी में

ना वर्क करूँगा

मैं तो जब भी करूँगा

अपना कार्य हिंदी में करूँगा

ना उर्दू में

तर्ज़ कहूँगा

ना अंग्रेजी में

सॉन्ग गाऊँगा

मैं तो जब भी गाऊँगा

गीत हिंदी में ही गाऊँगा

उर्दू में

ना मय्यत उठेगी

अंग्रेजी में

ना डैड होऊँगा

मैं तो जब भी मरूँगा

हिंदी में मरूँगा

विरेंद्र सिंह

 

हिंदी तो जाने हर कोई...

हिंदी तो जाने हर कोई
जाने हिंदी की परिभाषा,
कुछ और नही आता हमको
मेरी हिन्दी मेरी भाषा।

हिंदी हिंदी-हिंदी,
हिंदी हिंदी-हिंदी

हिंदी के साथ पला मैं
हिंदी के साथ जन्मा,
हिंदी मेरी सर-ज़मी
हिंदी ही माँ की भाषा।

हिंदी हिंदी-हिंदी,
हिंदी हिंदी-हिंदी

हिंदी मेरा बचपन
हिंदी है जवानी,
हिंदी मेरे अल्फ़ाज़
हिंदी मेरा बुढापा।

हिंदी हिंदी-हिंदी
हिंदी हिंदी-हिंदी

हिंदी हर विदेशी सीखे
हिंदी हर कोई गाता,
हिंदी मेरी दुल्हन जैसी
हिंदी से हर कोई भाता।

हिंदी हिंदी हिंदी,
हिंदी हिंदी हिंदी

- गुड्डू सिकंद्राबादी
8 वर्ष पहले
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