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दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा: सईद राही

रत्नेश मिश्र

Irshaad
                                    
                     
                                                  मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा 
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा 

हर बात गवारा कर लोगे मिन्नत भी उतारा कर लोगे 
ता'वीज़ें भी बंधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा 

तन्हाई के झूले खोलेंगे हर बात पुरानी भूलेंगे 
आईने से तुम घबराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा 
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जब सूरज भी खो जाएगा और चाँद कहीं सो जाएगा 
तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा 

बेचैनी बढ़ जाएगी और याद किसी की आएगी 
तुम मेरी ग़ज़लें गाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा 
6 वर्ष पहले
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