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चुनाव और धूमिल की ये कविता...

काव्य डेस्क

Irshaad
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                            यह आखिरी भ्रम है
        
                                                    
                            
दस्ते पर हाथ फेरते हुए मैंने कहा
तब तक इसी तरह
बातों में चलते रहो
इसके बाद...

वादों की दुनिया में
धोखा खाने के लिए
कुछ भी नहीं होगा

और कल जब भाषा...
भूख का हाथ छुड़ाकर
चमत्कारों की ओर वापस चली जाएगी

मैं तुम्हें बातों से उठाकर
आंतों में फेंक दूंगा
वहां तुम...

किसी सही शब्द की बगल में
कविता का समकालीन बनकर
खड़े रहना

दस्ते पर हाथ फेरते हुए
मैंने चाकू से कहा
7 वर्ष पहले
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