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अल्लामा इक़बाल: है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़ 

रत्नेश मिश्र

Irshaad
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                                                  लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद 
सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद 

ये हिन्दियों की फ़िक्र-ए-फ़लक-रस का है असर 
रिफ़अत में आसमाँ से भी ऊँचा है बाम-ए-हिंद 

इस देस में हुए हैं हज़ारों मलक-सरिश्त 
मशहूर जिन के दम से है दुनिया में नाम-ए-हिंद 
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है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़ 
अहल-ए-नज़र समझते हैं इस को इमाम-ए-हिंद 

एजाज़ इस चराग़-ए-हिदायत का है यही 
रौशन-तर-अज़-सहर है ज़माने में शाम-ए-हिंद 

तलवार का धनी था शुजाअ'त में फ़र्द था 
पाकीज़गी में जोश-ए-मोहब्बत में फ़र्द था 


जाम-ए-हिंद- हिन्द का प्याला सत्य की मदिरा से छलक रहा है

फिक्रे-फ़लक- महान चिंतन

रिफ़अत- ऊँचाई

बामे-हिन्द- हिन्दी का गौरव या ज्ञान

मलक- देवता

सरिश्त- ऊँचे आसन पर

एजाज़- चमत्कार

चिराग़े-हिदायत- ज्ञान का दीपक

तिराज सहर- भरपूर रोशनी वाला सवेरा

शुजाअ'त- वीरता

फ़र्द- एकमात्र

पाकीज़गी- पवित्रता 
6 वर्ष पहले
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