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अनवर मसूद का मज़ाहिया कलाम: है आप के होंटों पे जो मुस्कान वग़ैरा 

काव्य डेस्क

Hasya
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                                                  है आप के होंटों पे जो मुस्कान वग़ैरा 
क़ुर्बान गए उस पे दिल ओ जान वग़ैरा 

बिल्ली तो यूँही मुफ़्त में बदनाम हुई है 
थैले में तो कुछ और था सामान वग़ैरा 

बे-हिर्स-ओ-ग़रज़ क़र्ज़ अदा कीजिए अपना 
जिस तरह पुलिस करती है चालान वग़ैरा 

अब होश नहीं कोई कि बादाम कहाँ है 
अब अपनी हथेली पे हैं दंदान वग़ैरा 
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किस नाज़ से वो नज़्म को कह देते हैं नसरी 
जब उस के ख़ता होते हैं औज़ान वग़ैरा 

जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में 
घोड़ों की तरह बिकते हैं इंसान वग़ैरा 

हर शर्ट की बूशर्ट बना डाली है 'अनवर' 
यूँ चाक किया हम ने गरेबान वग़ैरा 

8 महीने पहले
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