विज्ञापन

मीडिया की बारीकियां बताती वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता की किताब का विमोचन

काव्य डेस्क

Halchal
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  पद्मश्री वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने पत्रकारिता के तमाम बिंदुओं को साथ लेकर एक किताब लिखी है 'पावर, प्रेस और पॉलिटिक्स।'  इस किताब का विमोचन 14 अगस्त को सुबह 11 बजे एक वेबिनार के माध्यम से किया गया। एक्सचेंड फ़ॉर मीडिया द्वारा आयोजित इस वेबिनार में ‘बिज़नेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज फ़ॉर मीडिया’ समूह के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ.अनुराग बत्रा, ‘नेटवर्क18‘ के एग्जिक्यूटिव एडिटर आनंद नरसिम्हन व ‘द वीक‘ के रेजिडेंट एडिटर सच्चिदानंद मूर्ति और ‘एबीपी न्यूज‘ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत ने हिस्सा लिया। 

वेबिनार में किताब की बारीकियों को लेकर चर्चा की गयी। इस किताब में पत्रकारिता के अनुभव के साथ-साथ वर्तमान की चुनौतियों और नयी पीढ़ी को लेकर भी कई पक्ष रखे गए हैं।  मीडिया में 50 वर्ष से भी अधिक का अनुभव रखने वाले किताब के लेखक आलोक मेहता ने विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ अपने अनुभवों को बताते हुए कहा कि उनके प्रकाशक ने सुझाव दिया कि उन्हें अपने विचार किताब के रूप में लिखने चाहिए। 
विज्ञापन

इसी के साथ सच्चिदानंद मूर्ति ने कहा कि आलोक मेहता कि किताब समाज के आईने की तरह है जो बताती है कि मीडिया की आज़ादी बड़ी चीज है। उनकी किताब में राज्यों और केंद्र की राजनीति को संतुलन के साथ बताया गया है। साथ ही किताब बीते 50 साल की परिस्थिति बताती है कि संपादन और प्रबंधन में कितने बदलाव आए हैं। हर मुद्दे को बहुत बारीक़ी और गहन अध्ययन के साथ लिखा गया है। 

रुबिका लियाकत ने बताया कि, आलोक मेहता की किताब उनकी स्मृतियों की यात्रा की तरह है। यह किसी क़िस्सागोई की तरह है और जब लोग किताब पढ़ेंगे तो उन्हें लगेगा जैसे उनके सामने कोई फ़िल्म चल रही है। लोगों को बहुत से तथ्य भी जानने को मिलेंगे। 

आनंद नरसिम्हन का कहना था कि आलोक मेहता की किताब में उनकी 20 साल तक की यात्रा बहरहाल उन्होंने पढ़ी है। किताब में उन 27 पत्रकारों के नाम हैं, जो आपातकाल के दौरान खड़े हुए, उनका नाम कहीं किसी मीडिया की किताब में नहीं है। फ़िरोज़ गांधी के बारे में या चारा घोटाला पर लिखने के कारण जो पटना में आलोक मेहता के साथ हुआ, वो सब पढ़ने के बाद समझ आता है कि लोकतंत्र की बात करने वाले कैसे अभिव्यक्ति की आज़ादी को प्रभावित करने की कोशिश करते थे। 

इसी सत्र में डॉ. अनुराग बत्रा ने आलोक मेहता को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, किताब में 36 लोगों की स्वीकृति में से वह ज़्यादातर सभी को जानते हैं जिससे पता चलता है कि किताब कितने बड़े स्तर पर और किन अनुभवों को आधार बनाकर लिखी गई है।‘ आगे उन्होंने आलोक मेहता के व्यक्तित्व पर कहा कि वह वह बेबाकी से लेकिन तब भी शालीन होकर अपनी बात कहते हैं। उन्होंने किताब के अलग-अलग अध्यायों के विषय में बताया कि उसमें दवाब और राजनीति के साथ-साथ स्टिंग ऑपरेशन आदि की चर्चा भी की गयी है।

इसके साथ ही वेबिनार में शामिल वक्ताओं ने अपने मीडिया संंबधी अनुभव भी साझा किए। 

5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12437 कविताएं

View Profile