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मेरा रंग फाउंडेशन ने शुरू किया 'रंग साहस का' सम्मान

काव्य डेस्क

Halchal
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दिल्ली-एनसीआर में लगातार हो रही बारिश के बीच मेरा रंग फाउंडेशन का कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। इस वर्ष से मेरा रंग फांडेशन ने एक सम्मान शुरू किया है, 'रंग साहस का'. पहला 'रंग साहस का' सम्मान यामिनी कुशवाहा को दिया गया है. मेरा रंग की तरफ से यह अवार्ड जानी-मानी लेखिका गीताश्री ने दिया। इस मौके पर संस्था की संस्थापक शालिनी श्रीनेत ने मेरा रंग की गतिविधियों पर बात की।


गाजीपुर की यामिनी को इंटर के बाद घर वालों ने आगे पढ़ाने से इनकार कर दिया। शादी के लिए दबाव, मारपीट और ओझा-झाड़फूंक जैसे उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। पुलिस के हस्तक्षेप से उसे सखी सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया। मेरा रंग ने स्थानीय प्रशासन की मदद ली, उनके माता पिता से बात की और इस बात के लिए राजी किया कि यामिनी की पढ़ाई आगे जारी रहे। यामिनी ने इस दौरान लगातार धैर्य और साहस बनाए रखा। यामिनी का यह साहस बाकी लड़कियों के प्रेरणा है। इसलिए इस वर्ष का 'रंग साहस का' सम्मान यामिनी को दिया गया।


यामिनी को 'रंग साहस का' सम्मान देती लेखिका गीता श्री

पहले पैनल डिस्क्शन का विषय था 'सोशल मीडिया और स्त्रीवाद'। इस पैनल के वक्ता थे योर स्टोरी हिंदी की एडीटर व सोशल मीडिया पर सक्रिय मनीषा पांडेय, प्रोफेसर व स्त्रीवादी आलोचक सुजाता, सोशल एक्टीविस्ट पूजा प्रियंवदा, लेखक-एक्टीविस्ट डॉ. सिद्धार्थ और ट्रांसजेंडर एक्टीविस्ट दीपिका। मनीषा, पूजा और सुजाता ने कहा कि सोशल मिडिया ने उन लोगों को स्पेस दिया है जिनकी अभिव्यक्ति को बरसों से दबाकर रखा गया था। दीपिका ने थर्ड जेंडर के सोशल स्पेस पर बात की, डॉ. सिद्धार्थ ने दलित विमर्श के संदर्भ सोशल मीडिया की संभावनाओं पर चर्चा की। इस पैनल का मॉडरेशन जर्नलिस्ट और सोशल मीडिया एक्सपर्ट गरिमा दत्त ने किया।

दूसरे सत्र में बात हुई स्त्री लेखन के युवा तेवर पर। इसमें युवा कथाकार अणुशक्ति सिंह, अंजू शर्मा, सविता पाठक और आरिफा एविस ने हिस्सा लिया। सभी वक्ताओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अब तक स्त्रियों के पास अपनी बात कहने का स्पेस बहुत कम था। आज महिलाएं विविध विषयों पर लगातार लिख रही हैं। बातचीत का संयोजन किया कवयित्री-कथाकार चंद्रकांता ने। इस अवसर पर छांव फॉउंडेशन के एसिड अटैक फाइटर्स साथियों की भी मौजूदगी रही। कार्यक्रम का संचालन किया अदीबा ने और धन्यवाद ज्ञापन किया जाने-माने आर्टिस्ट व लेखक सीरज सक्सेना ने। आयोजन गांधी शांति प्रतिष्ठान आईटीओ में हुआ।
3 वर्ष पहले
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