मशहूर शायर बशीर बद्र का उम्र संंबंधी समस्याओं के चलते गुरुवार 28 मई को निधन हो गया। कवि कुमार विश्वास ने उन्हें शृद्धांजति देते हुए कहा कि - श्रोता के रूप में वह उनसे तीन दशक से अधिक समय तक जुड़े रहे और बाद में मंच के ज़रिेये भी जुड़े। कुमार ने कहा कि बशीर बद्र जिस मुशायरे में होंगे वो मुशायरा कामयाब ही माना जाता था। मीना कुमारी ने भी अपनी डायरी में बशीर बद्र का शेर लिखा हुआ था।
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
कुमार एक संस्म्रण के ज़रिये बताते हैं कि उन्होंने बशीर बद्र को भारतीय ग़ज़ल का गौतम बुद्ध कहा था। जैसे बुद्ध ने संस्कृत से पालि में ग्रन्थ लाकर बातें आसान कीं वैसे ही बशीर बद्र ने ग़ज़ल के ज़़रिये किया। वे उन्हें बहुत ही मृदुभाषी व्यक्तित्व के तौर पर याद करते हैं।