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जश्न-ए-अदब 2019 - मशहूर शायर राहत इंदौरी के अल्फ़ाज़ से गूंजेंगी फ़िज़ाएं

दीपाली अग्रवाल

Halchal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे


राहत इंदौरी के नाम को किसी भी तआर्रूफ़ की ज़रूरत नहीं है। उनके यही कलाम ही उनकी पहचान हैं। वह जब मंच पर शायरी पढ़ने आते हैं तो सुनने वाले घंटों बैठकर उन्हें दाद दे सकते हैं। न सिर्फ़ उनके शेर पर बल्कि उन्हें कहने के अंदाज़ पर भी। राहत इंदौरी ने अपने कलामों में रूमानियत को कहा तो सत्ताधीशों पर निशाना भी साधा। जिन मुशायरों में वह शामिल होते हैं वह अपने आप में ही ख़ास हो जाता है। ऐसा ही ख़ास मुशायरा होने जा रहा है जश्न-ए-अदब में जिसमें आप राहत इंदौरी साहब को सुन सकते हैं। 

कार्यक्रम की जानकारी आपको इस लिंक के ज़रिए मिल जाएगी।
https://www.amarujala.com/jashn-e-adab

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उर्दू भाषा के प्रोफ़ेसर रह चुके राहत इंदौरी ने फ़िल्मों में भी गीत लिखे हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1950 को हुआ और पढ़ाई-लिखाई इंदौर शहर में ही हुई है। राहत देश के सााथ-साथ अमेरिका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया समेत विदेश में भी कई जगहों पर मुशायरों में भाग ले चुके हैं। रुत, मेरे बाद. धूप बहुत है आदि उनकी कुछ प्रसिद्ध किताबें हैं। 

6 वर्ष पहले
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