हिंदी हमारी मातृभाषा है। यह विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए चलाए गए अमर उजाला का ‘हिंदी हैं हम’ अभियान सतत जारी है।
इस अभियान की कड़ी में अमर उजाला काव्य हिंदी पखवाड़ा मना रहा है जिसके तहत कविता-कहानी, ऑनलाइन कवि सम्मेलन और आज का शब्द इत्यादि सामग्री पाठकों के सामने प्रस्तुत करता आ रहा है। इसी क्रम में काव्य कैफ़े का अगला एपिसोड 15 सितंबर 2021 को शाम 7 बजे होने जा रहा है। इस ऑनलाइन कवि सम्मेलन में विदेशों में रहते हुए हिंदी में लिखने- पढ़ने वाले मेहमान कवियों को आमंत्रित किया गया है।
भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे से अमर उजाला के फेसबुक पेज और यू-ट्यूब चैनल से कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया जाएगा। इस काव्यगोष्ठी में सूरीनाम से डाॅ पुष्पिता अवस्थी, यूनाइटेड किंगडम से डाॅ अजय त्रिपाठी, आशुतोष कुमार और ज़किया ज़ुबैर, ऑस्ट्रेलिया से युवा कवि व पत्रकार विवेक आसरी शिरकत कर करहे हैं। इसके अलावा वरिष्ठ कवि व लेखक डाॅ ओम निश्चल भी कार्यक्रम से बतौर संचालक जुड़ेंगे।
इस लिंक पर जाकर देख सकते हैं https://www.youtube.com/watch?v=8_vu-GXonIY
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डाॅ पुष्पिता अवस्थी:-
डाॅ पुष्पिता अवस्थी हिंदी कविता और साहित्य के क्षेत्र में स्थापित लेखिकाओं में से एक हैं। देश और विदेश में कुछ चुनिंदा शख़्सियतों में शुमार व विशिष्टता के साथ जानी- पहचानी जाने वाली डाॅ पुष्पिता अवस्थी की प्रतिष्ठा एक कवयित्री, लेखिका, संस्कृतिकर्मी व भाषाविद के रूप में है। वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वसंत महिला महाविद्यालय में 20 वर्षों तक हिंदी की विभागाध्यक्ष रही हैं। विगत कई वर्षों से सूरीनाम में रहती हैं।
ज़किया ज़ुबैरी:-
ज़किया ज़ुबैरी का जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ और शिक्षा- दीक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय से लेकिन वर्तमान में वे ब्रिटेन की नागरिक हैं। एक स्थापित कथाकार व कवयित्री होने का साथ- साथ ज़किया लंदन के बारनेट चुनाव क्षेत्र से लेबर पार्टी की निर्वाचित काउंसलर भी हैं। अब तक पांच चुनाव जीत चुकी हैं। बारनेट में पहली महिला मुस्लिम के रूप में प्रतिष्ठित हैं। कहानी संग्रह 'साँकल' राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित व प्रशंसित है।
विवेक आसरी:-
विवेक आसरी कर्म से पत्रकार, मन से घुमक्कड़ी और वचन से लेखक और कवि हैं। वह 15 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं। भारत, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के मीडिया संस्थानों में ऑनलाइन, रेडियो और टीवी पत्रकारिता कर चुके हैं, फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के एसबीएस रेडियो की हिंदी सेवा के लिए बतौर प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। जर्मनी की अंतरराष्ट्रीय सेवा डॉयचेवेले के साथ भी काम किया है, नाट्यकर्म में कई वर्षों से सक्रिय हैं। उनके पहले नाटक 'होली काउ का गोबर उर्फ कोर्ट मार्शल नहीं' को 2009 का मोहन राकेश सम्मान मिला था।
आशुतोष कुमार:-
आशुतोष जी भी वर्तमान में लंदन में ही रहते हैं और साहित्यिक गतिविधियों में हिस्सा लेते रहते हैं, मिजाज़ से कवि और शायर हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुतियां दे चुके हैं। पेशे से निजी कम्पनी में डायरेक्टर एवं एक अंतर्राष्ट्रीय कंपनी में सीनियर कंसलटेंट हैं। काव्य संग्रह 'विश्रांति के पल' प्रकाशनाधीन है, जिसके लिए उन्हें 2020 का डॉ लक्ष्मीमल्ल सिंघवी पुरस्कार भी मिल चुका है। विभिन्न स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में उनके गीत-ग़ज़ल और कविताओं का प्रकाशन होता रहता है।
डाॅ अजय त्रिपाठी:-
डाॅ अजय त्रिपाठी पेशे से डाॅक्टर (नेत्र चिकित्सक) हैं और मिजाज़ से कवि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं साथ ही मंचों पर भी सक्रिय रहते हैं।
डाॅ ओम निश्चल:-
डाॅ ओम निश्चल से अमर उजाला काव्य के पाठक और दर्शक तो परिचित ही होंगे, वे हिंदी के सुपरिचित कवि-गीतकार-आलोचक हैं। ओम निश्चल ने कविताओं व गीतों से अपने लेखकीय सफर का आगाज़ किया। उनके गीतों-कविताओं का एक खूबसूरत संग्रह 1987 में छपा और तब से कविता-गीत-ग़जल सभी विधाओं में वे लगातार लिखते रहे हैं। हिंदी कविता के अथक पाठक-विश्लेषक एवं समालोचक होने के नाते वे पांच दशकों के हिंदी काव्य के सबसे विश्वसनीय एवं बहुपठित समीक्षकों में गिने जाते हैं। उन्हें हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा नवोदित लेखक पुरस्कार, हिंदी संस्थान, उत्तरप्रदेश द्वारा आचार्य रामचंद्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार, जश्ने अदब द्वारा शान ए हिंदी खिताब से एवं कोलकाता की प्रतिष्ठित संस्था विचार मंच द्वारा प्रो.कल्याणमल लोढ़ा साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया है।
5 वर्ष पहले