प्रेम गीतों के महाकवि गोपाल दास नीरज अब हमारे बीच नहीं रहे। नीरज को अपने जाने का एहसास पहले से हो गया था। तभी तो वह पिछले छह माह के दौरान जहां भी जाते वहां कह देते थे कि शायद अब दुबारा न आना हो पाए...ये मेरी अंतिम यात्रा न हो। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार नीरज को गीतों के अलावा ज्योतिष की भी जानकारी थी। गत 16 जुलाई को जब नीरज मुरैना में बेटे अरस्तू प्रभाकर के पास जा रहे थे तब घर से निकलते समय उन्होंने अलीगढ़ में अपनी कोठी को खूब जी भर के देखा था।
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जानकार और रिश्तेदार तो मुलाकात के दौरान उनसे कहते थे कि दादा अभी तो आपको 100 बरस जीना है। इस पर नीरज कहते थे कि अब बहुत हो गया। अलीगढ़ में जनकपुरी स्थित कोठी से निकलते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि शायद अब दुबारा न आएं।
इसके बाद नीरज मुरैना जाने से पहले आगरा पहुंचे तो वहां उन्होंने बेटे अरस्तू प्रभाकर को नहीं पाया। नीरज ने फोन पर अरस्तू से कहा कि मैं तुम्हारे साथ मुरैना रहने के लिए आया हूं, तुम गायब हो। प्रभाकर ने कहा कि पिताजी अंतिम दौर में शायद एकांत में समय गुजारना चाहते थे।
लखनऊ के एक रिश्तेदार ने बताया कि नीरज ने उनसे कहा था कि अब मैं जिस शहर में जाता हूं, अपने परिचित और रिश्तेदारों से जरूर मिलता हूं। उनसे यह भी कहता हूं कि पता नहीं कब दुनिया से विदा हो जाऊं।