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अमिताभ बच्चन का स्वर और आलोक श्रीवास्तव की कविता: दूरदर्शन के 60 साल

रत्नेश मिश्र

Halchal
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                                                  15 सितंबर 2019 को दूरदर्शन ने अपनी 60 की यात्रा पूरी की। भारत में टेलीविजन के इतिहास की कहानी दूरदर्शन के इतिहास से ही शुरू होती है। भले ही आज टीवी चैनल्स और उन पर कार्यक्रमों की बाढ़ आ गई हो लेकिन दूरदर्शन के कार्यक्रमों की बात अलग है। 60 साल के सफ़रनामे पर मेगा स्टार अमिताभ बच्चन ने मशहूर शायर और पत्रकार आलोक श्रीवास्तव की लिखी एक कविता को अपनी आवाज़ दी। प्रस्तुत है आलोक श्रीवास्तव की कविता- 

इतिहास का मैं आईना हूँ
तहज़ीब का रंग सुनहरा हूँ
गंगा-जमुना मेरी आँखें
मैं नए भारत का चेहरा हूँ

मैं नए भारत का चेहरा हूँ
मैं नए भारत का चेहरा हूँ

मैं कल भी था, मैं आज भी हूँ
मैं नव-युग का अंदाज़ भी हूँ
सारी दुनिया का घर मुझ में
इस मिट्टी का आदर मुझ में 
मैं देशभक्त भी गहरा हूँ

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मैं नए भारत का चेहरा हूँ
मैं नए भारत का चेहरा हूँ 

मैं बेटी की मुस्कान में हूँ
मैं नारी के सम्मान में हूँ
विज्ञान में और किसान में हूँ
हर वीर में और जवान में हूँ
मैं सीमाओं का पहरा हूँ
 
मैं नए भारत का चेहरा हूँ
मैं नए भारत का चेहरा हूँ 

अब चाँद पे पाँव जमाना है
सूरज से आँख मिलाना है
इक नया सवेरा लाना है
संकल्प नया दोहराना है
ना ठहरा था, ना ठहरा हूँ

मैं नए भारत का चेहरा हूँ
मैं नए भारत का चेहरा हूँ

बताते चलें कि जब दूरदर्शन की शुरुआत हुई थी, उस समय का प्रसारण हफ्ते में सिर्फ तीन दिन आधा-आधा घंटे होता था और उस समय इसका नाम 'टेलीविजन इंडिया' दिया गया था,1975 में इसका हिन्दी नामकरण 'दूरदर्शन' किया गया।

1959 में शुरू होने वाले दूरदर्शन का1965 में रोजाना प्रसारण प्रारंभ हुआ, 5 मिनट न्यूज बुलेटिन भी इसी साल से शुरू हुआ। उसके बाद रामायण, महाभारत जैसे एक से बढ़कर एक कार्यक्रमों के साथ दूरदर्शन ने अपने शानदार 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 
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