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अमर उजाला शब्द सम्मान: सम्मानित हुईं साहित्य जगत की नामचीन हस्तियां

रत्नेश मिश्र

Halchal
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हिंदी के प्रख्यात कथाकार-संपादक ज्ञानरंजन और मराठी के विख्यात कवि-उपन्यासकार भालचंद्र नेमाडे को मुंबई के नरीमन प्वाइंट स्थित वाईबी चव्हाण सेंटर में आयोजित समारोह में अमर उजाला शब्द सम्मान के सर्वोच्च अलंकरण 'आकाशदीप' से नवाजा गया। इसके अलावा अन्य साहित्यकारों को भी उनकी कृति और योगदान के लिए सम्मान दिया गया। दोनों मनीषियों को लेखन-जीवन के समग्र अवदान के लिए यह सम्मान दिया गया। मशहूर शायर-फिल्मकार गुलजार इन्हें अलंकरण प्रदान किया। गत वर्ष यह सम्मान डॉ. नामवर सिंह को हिंदी के लिए और गिरीश कारनाड (कन्नड़) हिंदीतर भाषा में विशेष योगदान के लिए दिया गया था।

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आकाशदीप अलंकरण सम्मान  मराठी के विख्यात कवि-उपन्यासकार भालचंद्र नेवाडे और हिंदी के प्रख्यात कथाकार-संपादक ज्ञानरंजन को दिया गया।   

-कथेतर वर्ग में 'छाप' सम्मान सुनीता बुद्धिराजा की कृति ‘रसराज: पंडित जसराज’ को दिया गया। 

-किसी भी रचनाकार की पहली किताब के लिए 'थाप' सम्मान अंबर पांडेय की कृति ‘कोलाहल की कविताएं' को मिला। 

-भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए भाषाबंधु सम्मान  प्रख्यात रचनाकार शंख घोष की बांग्ला गद्य कृति ‘नि:शब्द की तर्जनी’ के हिंदी अनुवाद के लिए उत्पल बैनर्जी को प्रदान किया गया। 

-'छाप' श्रेणी में कथा (उपन्यास) वर्ग में ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास 'पागलखाना' को सम्मान मिला।

-कविता वर्ग में गगन गिल के संग्रह 'मैं जब तक आई बाहर' को यह सम्मान दिया गया।

मेरे जीवन की बड़ी उपलब्धि: नेमाडे

आकाशदीप मिलने पर भालचंद्र नेमाडे ने कहा कि उन्हें अमर उजाला का ये प्रतिष्ठित पुरस्कार पाकर बहुत प्रसन्नता हुई है। उनकी वजह से ये पुरस्कार मुंबई में आयोजित हो रहा है, ये बहुत अलग और सुखद एहसास है। मैं हमेशा से चाहता था कि हिंदी और मराठी के प्रतिष्ठित साहित्यकार साथ मिलें और बैठें। मैं इसे अपने जीवन की बड़ी उपलब्धि मानता हूं। भारत की भाषा और संस्कृति को बढ़ाने की बात करने वाले भी देश में अंग्रेजी को बढ़ावा देते हैं, ये बहुत अफसोस की बात है। खुद महात्मा गांधी ने हमें इस अंग्रेजियत के दुष्प्रभावों को लेकर आगाह किया था।

आम आदमी की कहानी जारी: गुलजार 

इस मौके पर गुलजार ने कहा- सीधा बोलना, साफ बोलना, चाहे किसी को बुरा लगे, सच को तो नरम नहीं किया जा सकता। ये आपकी (ज्ञानरंजन) खूबी है। इसे हम सलाम करते हैं। आपसे शिकायत है कि आपने कहानी छोड़ दी। लेकिन कहानी जारी है, आम आदमी की कहानी। आम आदमी मुरारीलाल की कहानी अभी भी चल रही है। आप जो कहते हैं उससे रहनुमाई मिलती है, इस तरह आप एक और बड़ा काम कर रहे हैं। 


अमर उजाला ने एक और बड़ा काम किया, हिंदी के अवॉर्ड देने का। इसके अलावा दूसरी भाषाएं भी हैं। छोटे इलाकों की भाषा। कौमी जुबान है हमारी। इनकी उम्र बहुत लंबी है। जो अदब पैदा हुआ है वह आज भी एक मिसाल है। 

एक नामदेव को हमने गुरु ग्रंथ साहब में पढ़ लिया था। एक नामदेव को हमने यहां पढ़ा। वो यहां के जीवन के बारे में बता रहे थे। हमने यहां का नमक चखा। खुद को महाराष्ट्रीयन कहने का हक रखता हूं। मैं कॉस्मोपोलिटन की मिसाल हूं इस वतन में। पंजाब में पैदा हुआ, इश्क बंगाल से किया और परवरिश महाराष्ट्र में हुई। 

भालचंद्र नेमाडे को जानता हूं, उनके साथ बैठकर कुछ कुछ सीख गया। कविताओं का अनुवाद किया। उनकी कविताओं के अनुवाद को अमर उजाला अवार्ड दे चुका है। ट्रांसलेशन को अवार्ड दे चुका है। ये मेरे लिए भी लाइफटाइम अचीवमेंट था। कोई आवाज शुद्ध है, साफ बोलती है, सच बोलती है तो वो सिर्फ लेखक की आवाज है। उसकी आवाज झंडे की तरह खड़ी है।

कुछ नए सार्थक आयाम भी जोड़ेंगे: राजुल माहेश्वरी 

कार्यक्रम के अंत में अमर उजाला समूह के प्रबंध निदेशक राजुल माहेश्वरी ने कहा- अमर उजाला फाउंडेशन के जरिए हमने भारतीय भाषाओं के बीच नया साझा बनाने की शुरुआत की थी। मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रसन्नता है कि एक नई पहल शुरू हुई है। इसमें हम कुछ नए सार्थक आयाम भी जोड़ेंगे ताकि इसका स्वरुप और व्यापक हो। आप सबका ह्रदय से आभार।   

अमर उजाला फाउंडेशन ने शब्द सम्मानों की स्थापना की

भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न के सम्मान में अमर उजाला फाउंडेशन ने शब्द सम्मानों की स्थापना की है ताकि भारत की समस्त भाषाओं में बंधुत्व को प्रोत्साहित किया जा सके। सर्वोच्च 'आकाशदीप' अलंकरण हिंदी व एक अन्य भारतीय भाषा के एक-एक साहित्य मनीषी को दिया जाता है।

अलंकरण में पांच-पांच लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और गंगा प्रतिमा सम्मिलित है। सम्मान की घोषणा पर कवि-उपन्यासकार भालचंद्र नेमाडे ने इसे मानवीय सभ्यताओं के विचार और भाषिक संस्कृति के मूल्यवान साझे की निरंतरता का सम्मान निरूपित किया है। वहीं, कथाकार ज्ञानरंजन ने कहा कि ये सम्मान रचनाधर्मिता के स्वतंत्र मिजाज का अभिनंदन है।

वर्ष 2018 की श्रेष्ठ हिंदी कृतियों के लिए भी एक-एक लाख रुपये के शब्द सम्मान दिया गया है। पहली किताब और अनुवाद के लिए भी विशेष सम्मान है।

बता दें कि इसी समारोह में निर्णय किया गया था कि हिंदी के साथ हिंदीतर भाषा के जिस रचनाकार को आजीवन शब्द साधना के लिए सम्मान मिलेगा, उस भाषा-प्रदेश की राजधानी में समारोह होगा। नेमाडे के मराठी में अतुलनीय योगदान के चलते महाराष्ट्र की राजधानी में यह आयोजन हुआ। 

ये रहे उच्चस्तरीय निर्णायक मंडल

इन कृतियों को प्रख्यात कथाकार अब्दुल बिस्मिल्ला, विख्यात कवि अरुण कमल, वरिष्ठ आलोचक नंदकिशोर आचार्य, सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका तथा प्रसिद्ध समीक्षक ज्योतिष जोशी के उच्चस्तरीय निर्णायक मंडल ने अपनी कसौटी पर परखा है।

उच्च मानदंडों को बनाए रखने के लिए यह निर्णायक मंडल प्रतिवर्ष नियमानुसार परिवर्तित होता है। अमर उजाला 'शब्द सम्मान' देश के सर्वाधिक प्रसारित हिंदी दैनिकों में शामिल अमर उजाला प्रकाशन समूह द्वारा प्रवर्तित अमर उजाला फाउंडेशन ने स्थापित किए हैं।

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