मशहूर शायर और गीतकार आलोक श्रीवास्तव पहली बार टेड टॉक, लखनऊ के मंच पर शामिल हुए। यह पूरा सत्र साहस, कलात्मकता और शब्दों की शक्ति पर आधारित रहा। "किसी चीज़ के पीछे जितना भागेंगे, वो चीज़ उतनी ही आपसे दूर होती जाएगी लेकिन अपने सपनों के पीछे जितनी शिद्दत से भागेंगे, वो उतनी ही जल्दी सच होंगे।"
अपनी शायरी और कहानी के ज़रिये आलोक श्रीवास्तव ने जीवन की कठिनाइयों और उनसे निकल पाने के साहस के बारे में बताया।
"मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है
हौसला हो तो फ़ासला क्या है"
हॉल में गूंजता ये शेर श्रोताओं को उनके भय से निबटने और आशा रखने के लिए प्रेरित कर रहा था। आलोक श्रीवास्तव के सत्र ने बताया कि कैसे भाषा और कला किसी भी खाई को भरने में सक्षम है, ये जीवन के तमाम मोड़ों पर किसी साथी की तरह रहती है।