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विकल्पहीनता का दंश: किधर है जनता और आप कहां हैं?

काव्य डेस्क

Book Review
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पत्रकारिता के क्षेत्र में अहम स्थान रखने वाले अपूर्व जोशी की पुस्तक 'विकल्पहीनता का दंश' एक महत्पूर्ण मुद्दे पर लिखी गई है। यह स्वत: व्याख्यायित है कि किस प्रकार भारतीय जन को राजनीतिक-आर्थिक तंत्र ने विभिन्न नारों से ठगा है। इस दृष्टि से हर पार्टी की सरकार पर लेखक ने तंज कसा है। इस पुस्तक के केंद्र में सियासत, फैसला, विचारों की विलुप्ति, भ्रष्टाचार, ईमानदारी की विलुप्ति है। पुस्तक के माध्यम से लेखक हमें संघर्षरत और बेबस जनता के साथ न सिर्फ खड़ा दिखता है, बल्कि वह हमारे लिए वैचारिक लड़ाई भी लड़ता है। इन तमाम निराशाओं के बाद भी वह हार नहीं मानता। अपनी बेबाकी से इतने अहम विषय पर लिखना प्रसंसा के योग्य है।


लेखक- अपूर्व जोशी
प्रकाशक- अनन्य प्रकाशन
दिल्ली
मूल्य- 450  रुपये
8 वर्ष पहले
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