किताब 'होमो डेयस: आने वाले कल का संक्षिप्त इतिहास' में लेखक युवाल नोआ हरारी ने जो घटित नहीं हुआ है, उसका भी इतिहास लिख दिया है। बात सुनने में बहुत अजीब लगती है कि जो अभी घटित भी नहीं हुआ है, उसका इतिहास कैसे लिखा जा सकता है? लेकिन युवाल नोआ हरारी ने अपने लेखन की पूर्वपीठिका वर्तमान के तथ्यों के आधार पर तैयार की है।
इस किताब की विषय-वस्तु अपने आप में अनोखी है। हरारी का आंकलन है कि इंसान दरअसल भगवान बनने के बेहद करीब है। किताब मानव सभ्यता में श्रेष्ठता भाव के बढ़ते संघर्ष की कहानी है। लेखक का मानना है कि इंसान भगवान की जगह तो लेना चाहता है, लेकिन बहुत बड़ी संख्या में मानव जाति के सामने बेकार होने का खतरा आसन्न है।
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आने वाला समय ऐसा चुनौतीपूर्ण होगा कि मानव जाति के भविष्य का अनुमान लगाना असंभव होता जा रहा है। युवाल ने तकनीक पर बढ़ती निर्भरता और दिनों-दिन बढ़ती वैज्ञानिक प्रगति को आधार बनाया है। मशीनों के आविष्कार के बाद मानव बुद्धि की तीक्ष्णता के नए आयाम सामने आए। डाटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अब मनुष्य के ऊपर कंप्यूटर के हावी होने की पटकथा लिखनी शुरू कर दी है। अब समय मानवीय भावनाओं और संवेदनाओं को मशीन में समाहित करने का है।
एक तरह से ऐसे तकनीकी विकास मानव की सत्ता को चुनौती देते लग रहे हैं। युवाल अपने किताब में यही सवाल उठाते लग रहे हैं कि क्या मानव अपनी उपयोगिता खोने की तरफ अग्रसर है? वह उस दौर की बात करते हैं, जब भौतिक दुनिया में अपनी जरुरत खोकर इंसान तकनीक के दम पर ईश्वर का प्रतिदर्श बनने की तरफ बढ़ेगा। किताब में उस समय के प्रति भी चिंता जाहिर की गई है, जब विज्ञान हमें मरने नहीं देगा और मशीनें हमें जीने नहीं देंगी। युवाल के अनुसार इस दौर की शुरुआत हो चुकी है।
लेखक ने तेजी से खत्म होते जंगलों, विलुप्त होते पशु-पक्षियों और वैश्विक तापनअादि की चर्चा की है। किताब में मानव सभ्यता के नवीनतम परिवर्तनों के रूप में रेखांकित करते हुए कई पहलुओं को छुआ गया है। यह किताब मानव सभ्यता के इतिहास और वर्तमान से जुड़ी घटनाओं से आने वाले कल का इतिहास लिखती है।
किताब- होमो डेयस: आने वाले कल का संक्षिप्त इतिहास
लेखक- युवाल नोआ हरारी
प्रकाशक- मंजुल पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली
मूल्य- 450 रूपये