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आज का विचार: मन्नू भंडारी

काव्य डेस्क

Aaj Ka Vichar
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                            आदमी जब अपनी सीमा और सामर्थ्य को भूलकर कामना करने लगे तो समझ लो, पतन की दिशा में उसका पहला कदम बढ़ गया।
        
                                                    
                            
~मन्नू भंडारी
2 वर्ष पहले
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