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स्कूलों में नहीं पहुंचीं पुस्तकें, शिक्षक बोले- पढ़ने का काम कैसे दें

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राजकीय स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे। संवाद - फोटो : Sirsa
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। राजकीय स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां एक जून से शुरू होने जा रही है, लेकिन विद्यार्थियों के पास अभी तक पुस्तकें नहीं पहुंची है। विभाग के पास भी पुस्तकों को लेकर कोई अपडेट नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के पास पुस्तकें है नहीं तो उन्हें पढ़ने का काम कैसे दें। इसलिए बच्चों को लर्निंग का काम नहीं दिया गया है।
राजकीय स्कूल में शिक्षक विद्यार्थियों को पुरानी, पुस्तकों से ही पढ़ा रहा था, लेकिन अब गर्मी की छुट्टियों में बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। विद्यार्थियों को समझ नहीं आ रहा है कि छुट्टियों में शिक्षकों द्वारा दिया गया काम कैसे पूरा करेंगे, क्योंकि उनके पास पुस्तकें नहीं है। दूसरी ओर शिक्षक भी असमंजस में है कि बच्चों को किस प्रकार से छुट्टियों का काम दें। इसके अलावा विभाग अधिकारियों को नहीं पता है कि निदेशालय द्वारा पुस्तकें क्यों नहीं भेजी जा रही है। ऐसे में शिक्षक शिक्षक स्वयं अपने हाथों से वर्क बुक तैयार कर रहे हैं। एक विषय की एक वर्क बुक तैयार करवाई जा रही है। शिक्षक बंसीलाल झोरड़ ने बताया कि दो माह बीत जाने के बाद भी निदेशालय द्वारा पुस्तकें नहीं दी जा रही है। इसके कारण अब छुट्टियों में विद्यार्थियों को काम देना जरूरी है। इसलिए सभी शिक्षक विद्यार्थियों के लिए हाथ से ही वर्क बुक तैयार कर रहे हैं।
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प्रतिदिन व्हाट्सएप पर भेजेंगे पीडीएफ
शिक्षक प्रतिदिन वर्क बुक की पीडीएफ अभिभावकों के व्हाट्सएप पर भजेंगी। इसके बाद बच्चे डाउनलोड कर उसे अपनी नोट बुक में उतार पाएंगे। शिक्षिका भारती रोहिल्ला का कहना है कि प्रत्येक शिक्षक के लिए वर्क बुक बच्चों को फोटो कॉपी करवा के देना मुमकिन नहीं है, इसलिए वर्क बुक को प्रतिदिन व्हाटसएप पर भेजेंगे, ताकि बच्चों पर एक साथ काम का बोझ भी न पड़े।
बच्चों पर काम पड़ेगा अतिरिक्त भार
पहले बच्चों को वर्क बुक पर सिर्फ उत्तर ही लिखना होता था, लेकिन इस बार वर्क बुक न आने के कारण विद्यार्थियों को शिक्षिकों द्वारा भेजी गई पीडीएफ को पहले डाउनलोड करना होगा। इसके बाद उसे अपनी नोट बुक में उतारना होगा और उत्तर लिखने होंगे। इससे विद्यार्थियों को दोगुनी मेहनत करनी होगी।
छुट्टियों में लर्निंग का नहीं दिया जाएगा काम
हर बार गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों द्वारा पुस्तकों को पढ़ने, कविताओं को याद करने, कहानियां पढ़ने का काम दिया जाता था, लेकिन इस बार बच्चों को पढ़ने का काम नहीं दिया है। शिक्षक महावीर का कहना है कि बच्चों के पास पुस्तकें है ही नहीं तो उन्हें पढ़ने का काम कैसे दें। इसलिए बच्चों को लर्निंग का काम नहीं दिया गया है।
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वर्जन
पुस्तकों व वर्क बुक्स को लेकर निदेशालय की ओर से कोई दिशा निर्देश नहीं है। उड़ान प्रोजेक्ट के तहत सॉफ्ट कॉपी आई है। इन्हीं कॉपी से बच्चों को तैयारी करवाई जा रही है। - शशि सचदेवा, सहायक परियोजना अधिकारी।
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