करनाल की चंद्रीमा अत्री ने पहली कोशिश में ही हासिल किया 72वां रैंक
करनाल के गांव अरडाना की चंद्रीमा अत्री ने पहली कोशिश में ही यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया में 72वां रैंक पाया है। बचपन से चंद्रीमा को उसके दादा स्व. बीएल अत्री (इनकम टैक्स विभाग से डीटीओ रिटायर्ड) ने आईएएस बनने का सपना दिखाया था। चंद्रीमा ने बताया कि उसने ग्रेजुएशन दिल्ली से की और वहीं से एलएलबी की। साथ ही यूपीएससी की तैयारी की।
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रिद्धिमा ने गलतियों को सुधारा और दूसरे प्रयास में पूरा कर लिया सपना
सेक्टर-24 की रहने वाली रिद्धिमा श्रीवास्तव ने आईएएस की परीक्षा में 74वीं रैंक हासिल की है। रिद्धिमा ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से वर्ष 2017 में इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है। उसके बाद वह सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी में जुट गई थी। रिद्धिमा के मुताबिक साल 2018 में भी परीक्षा दी लेकिन प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सकी। निराश होने के बजाय उन्होंने फिर से तैयारी की और सफलता प्राप्त की। दूसरे प्रयास से पहले उन्होंने छोटी-छोटी गलतियों को सुधारा और उस पर काम किया।
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मधुमिता ने तीसरे प्रयास में पूरा किया पिता अधूरा सपना
पानीपत की मधुमिता ने अपने तीसरे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 86 ऑल इंडिया रैंक हासिल कर पानीपत का नाम रोशन किया है। उनकी इस सफलता में पिता का बड़ा योगदान है, जिन्होंने आईएएस की सीढ़ी चढ़ने का बेटी को हौसला दिया। पिता महावीर सिंह ने 1987 में आईएएस बनने का सपना देखा था। परीक्षा में बैठे लेकिन उत्तीर्ण नहीं हो सके। इसके बाद पिता ने दोबारा परीक्षा दी ही नहीं।
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सरकारी स्कूल से पढ़े मनोज कुमार ने हासिल किया 732वां रैंक
बहादुरगढ़ के सरकारी स्कूल से 12वीं पास करने वाले वार्ड- 23 की शक्ति नगर कॉलोनी निवासी मनोज कुमार ने यूपीएससी परीक्षा में 732वां रैंक हासिल किया है। नगर परिषद बहादुरगढ़ की चेयरपर्सन शीला राठी समेत अनेक लोगों ने मनोज के घर पहुंचकर बधाई दी। मनोज कुमार ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बहादुरगढ़ से विज्ञान में 12वीं करने के बाद पंजाब के रोपड़ से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। फिर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड से फाइनेंस में एमबीए की।
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अपराजित ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी और पहले प्रयास में मिली 174वीं रैंक
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में हिसार के सेक्टर-14 निवासी अपराजित ने 174वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि उन्होंने पहले प्रयास में ही यह परीक्षा पास की है। अपराजित ने बताया कि वह हरियाणा कैडर में आना चाहते हैं। अपराजित ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012 में सीबीएसई से दसवीं और 2014 में बारहवीं कक्षा पास की थी।
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दर्पण ने तय किया डॉक्टर से आईएएस बनने तक का सफर
यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा में ऑल इंडिया 80वां रैंक हासिल करने वाली दर्पण आहलूवालिया की स्कूली पढ़ाई मोहाली और चंडीगढ़ में हुई। इसके बाद डिग्री पटियाला में हुई है। वर्ष 2011 में उन्होंने पटियाला के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की। 2017 में यह पूरी हुई। इसके तुरंत बाद ही 2018 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी। साक्षात्कार होने तक उनका लिस्ट में नाम नहीं आया। इसके बाद उन्होंने 2019 में दोबारा परीक्षा की तैयारी की और कड़ी मेहनत से इस बार सफलता उनके हाथ लगी।
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तीन प्रयासों में असफल रहने पर भी हार नहीं मानी, चौथे प्रयास में हासिल की 222वीं रैंक
हिसार मंडलायुक्त विनय सिंह की बेटी देवयानी ने यूपीएससी की परीक्षा में 222वीं रैंक हासिल की है। देवयानी का यह चौथा प्रयास था। इससे पहले देवयानी ने वर्ष 2015, 2016 व 2017 में भी यह परीक्षा दी थी। वर्ष 2017 में तो वह इंटरव्यू स्टेज तक पहुंच गई थीं। तीन बार परीक्षा में असफल होने के बाद भी देवयानी ने हार नहीं मानी और चौथी बार में सफलता हासिल की। देवयानी फिलहाल राजस्थान के अलवर जिले में चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
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चार साल से तैयारी कर रहे थे सिविल लाइंस निवासी राघव जैन
मेहनत के दम पर हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। लुधियाना सिविल लाइंस निवासी राघव जैन ने भी मेहनत कर मंगलवार को घोषित सिविल सर्विसेज के परिणाम में ऑल इंडिया स्तर पर 127वां रैंक हासिल किया है। राघव इस रैंक को हासिल करने का श्रेय अपने मन की इच्छा और स्मार्ट वर्क को देते हैं। इस मुकाम को हासिल करने के लिए वह चार साल से लगातार मेहनत कर रहे थे। पहले छह माह दिल्ली में रहकर परीक्षा की तैयारी की। इसके बाद वह लुधियाना लौट आए और यहीं तैयारी की।
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किसान के बेटे का यूपीएससी में चयन, नौकरी छोड़ की तैयारी, हासिल की 232वीं रैंक
यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) में जींद जुलाना के वार्ड नंबर एक निवासी रिंकू लाठर का चयन हुआ है। उन्हें 232वीं रैंक मिली है। रिंकू के प्रदर्शन से परिवार में खुशी का माहौल है। रिंकू ने कहा कि चौथी बार में उसने यह परीक्षा पास की है। इससे पहले वह उदयपुर स्थित भारत पेट्रोलियम कंपनी में एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रहते हुए 2016 में पहली बार परीक्षा दी थी। उसके साथ 2017 व 2018 में भी परीक्षा दी लेकिन नौकरी के दौरान पढ़ाई के लिए समय नहीं निकाल पाने के कारण वह परीक्षा में पास नहीं हो पाया था। इसके बाद 2018 में उसने नौकरी छोड़ दी और घर पर रहकर ही दिन में 13 से 14 घंटे पढ़ाई करते हुए यह मुकाम हासिल किया।
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17 लाख के पैकेज की नौकरी छोड़ी, अभिषेक ने तीसरी बार में पास की परीक्षा
लोक सेवा आयोग का परिणाम मंगलवार को घोषित हो गया। नारनौल के गांव भांखरी निवासी अभिषेक ने 288वां रैंक हासिल किया। अभिषेक ने तीसरे प्रयास में यह परीक्षा उत्तीर्ण की। पिछले वर्ष अभिषेक ने 595 रैंक हासिल किया था। अभिषेक के पिता सरकारी अध्यापक है। आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने की खबर मिलते ही अभिषेक के घर पर लोगों का बधाई देने का तांता लगा रहा।
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पिता हैं किसान और बेटे ने यूपीएससी परीक्षा में हासिल की 682वीं रैंक
हरियाणा के बाढ़डा कस्बे के गांव गोपालवास निवासी किसान के बेटे मंदीप पूनिया ने यूपीएससी परीक्षा में 682वीं रैंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। ग्रामीणों ने मंदीप पूनिया को बधाई दी है। गांव गोपालवास निवासी किसान पालेराम के पुत्र मंदीप पूनिया ने बारहवीं कक्षा शिक्षा भारती स्कूल से ग्रहण की। गणित विषय में रुचि होने के कारण दिल्ली के हिंदू कॉलेज से स्नातक और बाद में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की।
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कंचन ने हासिल की 35वीं रैंक, मम्मी-पापा ने दी परिणाम की जानकारी
सिरसा की कोर्ट कॉलोनी की रहने वाली कंचन सिंगला ने यूपीएससी 2019 की परीक्षा में ऑल इंडिया में 35वीं रैंक हासिल की है। कंचन ने यह उपलब्धि 24 साल की उम्र में प्राप्त की है। कंचन के पिता अनिल सिंगला शहर में चाटर्ड अकाउंटेंट हैं और माता प्रवीण सिंगला गृहिणी हैं। कंचन का एक छोटा भाई अनुज है, जो कि बीए ऑनर्स कर रहा है।
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