जेपी दलाल ने मौका देख एसवाईएल पर भी दावा ठोक दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने अपने छोटे भाई हरियाणा के साथ नाइंसाफी की है। इतने सालों से एसवाईएल का पानी रोक रखा है। अब सोनीपत-बहादुरगढ़ के उद्यमी इस आंदोलन से परेशान हैं। वहां के उद्योग धंधे बर्बाद हो रहे हैं।
जाखड़ पहले दे चुके हैं बयान
किसान आंदोलन के बारे में कांग्रेस के रुख की एक झलक बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस प्रधान पद पर नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी के समारोह के दौरान भी दिखाई दी थी, जब पूर्व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि हमने किसान आंदोलन का रुख केंद्र की तरफ मोड़ दिया है, जो कि जरूरी भी था। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा लेकिन तीन कृषि कानून लाने वाली भाजपा की केंद्र सरकार तक उनकी आवाज नहीं पहुंच रही थी। जैसे ही किसानों ने देश की राजधानी पर दस्तक दी, केंद्र सरकार को अपनी गलती का एहसास तभी से होने लगा था, भले ही अपने अहम के कारण सरकार झुकने को तैयार नहीं है।
हरसिमरत ने भी कैप्टन को घेरा
शिअद नेता और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से ट्वीट कर पूछा है कि कांग्रेस ने अपने मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव क्यों नहीं पास किया। जिस मंत्री ने मुख्यमंत्री के पैनल में आपकी तरफ से संसद में कृषि कानूनों की मंजूरी दी थी। उन्होंने कैप्टन को गुटका साहिब की कसम की भी याद दिलाई।
मनोहर लाल पर कैप्टन ने साधा था निशाना
इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि किसानों में बढ़े आक्रोश और बेचैनी के लिए पंजाब नहीं, बल्कि भाजपा सीधे तौर पर जिम्मेदार है। कैप्टन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के आरोप की निंदा की थी और कहा था कि मनोहर लाल करनाल में किसानों पर हुए हमले से खुद का बचाव कर रहे हैं। कैप्टन ने यह प्रतिक्रिया मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला द्वारा कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के पीछे पंजाब का हाथ होने के आरोपों के संदर्भ में कही थी।
मनोहर लाल ने दी कैप्टन को चुनौती
हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि पड़ोसी राज्य ने चुनाव नजदीक देख चार साल बाद गन्ने का भाव बढ़ाया है। अगर कांग्रेस सरकार किसान हितैषी होने का इतना ही दंभ भरती है तो किसानों को हमारी तर्ज पर गन्ने का भाव और पिछला एरियर देकर दिखाए।