चंद सांसें बची हैं आखिरी दीदार दे दो
झूठा ही सही मगर एक बार प्यार दे दो
हम तो उम्र भर के मुसाफिर हैं मत पूछ
तेरी तलाश में कितने सफर किए हैं हमने
टूट कर बिखर जाते हैं वो लोग दीवारों की तरह
जो खुद से भी ज्यादा किसी और से मुहब्बत करते हैं
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