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वायरल शायरी: जीने का मज़ा...

वायरल शायरी
                
                                                         
                            जब थोड़े में मन खुश था
                                                                 
                            
तब जीने का मजा हीं कुछ और था
नहीं थे जब ऐसी कूलर
तब छत पर सोने का मजा कुछ और था

गर्मी की भरी दोपहर में झरती मटकी का
पानी पीने का वो दौर कुछ और था
रात में छत पर रखी सुराही का ठंडा पानी
पीने का मजा हीं कुछ और था आगे पढ़ें

जोर से पसरने का मजा ही कुछ और था

8 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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