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हिंदी कविता: अस्सी के दशक में खुशियों की तलाश...

purushottam vyas hindi kavita assi ke dashak mein khushiyon ki talash
                
                                                         
                            

इक्कीसवीं सदी के लोग
अस्सी के दशक में खुशियाँ तलाश रहे
क्या उन्हें पता चल गया
इक्कीसवीं सदी में लोग खुश नहीं हैं...

भेड़चाल में भागे 
बदल नहीं रहे अंतर्मन को...
आडंबर रचे 
पा लिया चाँद से लेकर एआई तक  
सायकल से लेकर प्लेन तक 
शादी से लेकर तलाक तक

फिर भी अस्सी दशक में
खुशियाँ तलाश रहे

कर्तव्य को बिसराकर अधिकार(आंदोलन)
की बातें 
छोटी-छोटी बातों को 
पहाड़ बना 
नींबू के अचार की रेसिपी 
यूट्यूब में देख 
पापड़ भी ऑनलाईन मँगवा रहे...

प्रेमविहीन समाज यूँ ही
चलता रहेगा
प्रेम के लिए और कुछ 
चलता रहेगा
फटेहाल कवि कविता में
रहेगा जीते  
पडोसी उसे पहचान भी नही पाएगा

दूर के ढोल लगते बड़े सुहाने
हर सदी का होता अपना-अपना संघर्ष
संतोषी जीवन ही 
खुशियों का होता आधार 
- पुरूषोत्तम व्यास
 

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46 minutes ago

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