हिम्मत रख बदलेगा मंजर,
संकट का पल कट जायेगा।।
फिर से होगा नया सबेरा
घोर अँधेरा छट जायेगा।।
अरुणाचल में लाली होगी,
कलरव होगा घर आंगन में।
ऊषा बटोरेगी नव नीरद,
मधु पल्लव होगा उपवन में।
मधुपों-मुकुलों के मलय वात से
किसलय खिलकर मुस्कायेगा।।
हिम्मत रख बदलेगा मंजर,
संकट का पल कट जायेगा।।
पल ये कठिन बहुत है लेकिन,
इससे अब घबराना कैसा।।
भाग्य नीड़ यह परिवर्तन है,
किसी पे दोष लगाना कैसा।।
धूप दोपहरी निष्फल जीवन,
शुभ आशा से घट जायेगा।।
हिम्मत रख बदलेगा मंजर,
संकट का पल कट जायेगा।।
लक्ष्य से तुम ना कभी विचलना,
राह में चाहे कोटि बाधा हो।
हौसलों की ढाल बनाकर,
भाग्य मूल केवल साधा हो।।
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