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Social Media Poetry: गीत प्रेम के गाया करती, बेसुध मुझे निहारा करती

सोशल मीडिया
                
                                                         
                            गीत प्रेम के गाया करती,
                                                                 
                            
बेसुध मुझे निहारा करती,
अपनी छत पर बैठ अकेले,
बस मुझको दोहराया करती,
तब मैं  तुमसे पूछ रहा हूँ,
क्या तुम मेरा प्यार नहीं  हो,

बनठन कर वो पढ़ने आती,
मेरी खातिर रूप सजाती,
अपने दिल के हर कोने में,
बस मेरी तस्वीर बसाती,
तब मैं तुमसे पूछ रहा हूँ....

सुबह शाम बस मुझको रटना,
अंतर्मन में मेरा खटकना,
सखियाँ पूछे  प्यार हुआ क्या,
झट  से तेरा उन्हें डपटना,
तब मैं तुमसे पूछ  रहा हूँ...... आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

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