आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Social Media Poetry: सोच रहे थे साथ तुम्हारे, हम दुनिया के पार चलेंगे

वायरल काव्य
                
                                                         
                            मंदिर मंदिर द्वारे द्वारे
                                                                 
                            
हम घूमे बनकर बंजारे
गाँव गली आँगन चौबारे
जिसने देखा चरण पखारे
सबके मन को जीत लिया पर
केवल एक तुम्हीं से हारे 
बन न सके मनमीत तुम्हारे

सोच रहे थे साथ तुम्हारे
हम दुनिया के पार चलेंगे
जन्मों तक जो रहे हमारा
लेकर वह अधिकार चलेंगे
लेकिन टूट गए सब सपने
क्या करते किस्मत के मारे

साथ अगर होते तो होता
अपना घर भी सबसे न्यारा
सोचो कितना सुंदर होता
कोई ध्रुव या श्रवण हमारा
शायद इस अनुकूल नहीं थे
अपने ग्रह नक्षत्र सितारे आगे पढ़ें

11 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर