हिंदी मेरे रोम-रोम में,
हिंदी में मैं समाई हूँ,
हिंदी की मैं पूजा करती,
हिन्दोस्तान की जाई हूँ
सबसे सुन्दर भाषा हिंदी,
ज्यों दुल्हन के माथे बिन्दी,
सूर, जायसी, तुलसी कवियों की,
सरित-लेखनी से बही हिंदी
हिंदी से पहचान हमारी,
बढ़ती इससे शान हमारी,
माँ की कोख से जाना जिसको,
माँ,बहना, सखि-सहेली हिंदी
निज भाषा पर गर्व जो करते,
छू लेते आसमाँ न डरते,
शत-शत प्रणाम सब उनको करते,
स्वाभिमान…..अभिमान है हिंदी
हिंदी मेरे रोम-रोम में,
हिंदी में मैं समाई हूँ,
हिंदी की मैं पूजा करती,
हिन्दोस्तान की जाई हूँ
(ये कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।)
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