वो प्रतिपल रूप बदलता है,
थिरकते बादल में वो कौन?
है कितना चारु,चपल,गतिमान,
छुपा सा नृत्य प्रदर्शित मौन।।
वो गर्जन सम की थाप लिए,
राग मल्हार हुआ साकार ।
निहारूं,चकित,भ्रमित,विस्मित,
धरा का नव आकार प्रकार ।।
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