आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

साहिल सहरी: हमारी राह में कलियाँ नहीं हैं काँटे हैं

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कहाँ कहाँ पे लुटे हो शुमार मत करना
                                                                 
                            
मगर किसी पे भी अब ए'तिबार मत करना

हमारी राह में कलियाँ नहीं हैं काँटे हैं
हमारी राह कभी इख़्तियार मत करना

बहुत ही क़ीमती है ये तिरे बदन का लिबास
किसी ग़रीब के बच्चे को प्यार मत करना

मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर
सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना

शराब-ख़ाने का रस्ता भी छूट जाएगा
शराब-ख़ाने में 'साहिल' उधार मत करना

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o  

एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर