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राफ़िया ज़ैनब: कोई इतना बे-सहारा कैसे हो सकता है यार

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कोई इतना बे-सहारा कैसे हो सकता है यार
                                                                 
                            
एक मंज़र पर गुज़ारा कैसे हो सकता है यार

ख़ाक पानी और सबा का भी तो कुछ हिस्सा रहे
फूल आख़िर बस तुम्हारा कैसे हो सकता है यार

इश्क़ में हो वस्ल या के हिज्र दोनों हैं बजा
दिल का सौदा है ख़सारा कैसे हो सकता है यार

मौत से पहले करूँ तौबा मैं याद-ए-यार से
मुझ से मजनूँ को गवारा कैसे हो सकता है यार

तुझ को चाहे जो मैं उस पर वार दूँ दुनिया जहाँ
इस से बढ़ कर कोई प्यारा कैसे हो सकता है यार

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7 घंटे पहले

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