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Urdu Poetry: वो चढ़ावा कि जो लुट जाए महज़ पल भर में

उर्दू अदब
                
                                                         
                            दूध का दूध यहां पानी का पानी होगा 
                                                                 
                            
ऐसी तफ़्तीश का मंज़र भी कहानी होगा 

है हुकूमत का ये  ऐलान बचेगा न कोई 
ज़द में आ जाएगा जो  दुश्मन ए जानी होगा 

वो चढ़ावा कि जो लुट जाए महज़ पल भर में 
इससे नाराज भला कौन न दानी होगा 

दागदार आज  हुआ है ये अवध का आंचल 
नहीं  मालूम कि कब घुल के वो धानी होगा 

राम को काम कहां मोतियों औ माणिक से 
अब ये किस्सा भी मगर राम कहानी होगा 

दान दौलत से भरी है कहां प्रभु की झोली 
ये बतलायेगा  हर  शख्स जो ज्ञानी होगा 

कैद रखिए भले मस्जिद में  शिवालों में उसे 
हाँ वजूद उसका कभी भी नहीं  फ़ानी होगा 

खड़ा मिलेगा उसके दर पे हर गरीबओअमीर 
और  फैलाए  हुए  हाथ  अडानी  होगा

- ओम निश्चल

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2 महीने पहले

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