आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ओम निश्चल: कितने अनशन औ हड़तालें देखेगा जंतर मंतर

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कितने अनशन औ हड़तालें देखेगा जंतर मंतर
                                                                 
                            
इंकलाब की लिये मशालें देखेगा जंतर मंतर 
 
जिनके कंधों पर भविष्य का देश लदा हो उन सब की
एक साथ लाखों पदचापें देखेगा  जंतर मंतर  

अपने ही लोगों के डर से व्यूह बनी है रजधानी 
लोकतंत्र की फिर ललकारें देखेगा जंतर मंतर 

चारो तरफ पुलिस के दस्ते अफ़रा तफ़री मची हुई
हाथ लिये ढालें - तलवारें देखेगा जंतर मंतर 

कितनी ही सरकारें आईं औ कितनी ही चली गईं,
आएंगी कितनी सरकारें देखेगा जंतर मंतर 

सूना सूना गुज़र न जाए मानसून का सत्र कहीं 
युवा शक्ति की फिर तक़रीरें देखेगा जंतर मंतर 

राम राज्य के सारे सपने कैसे-कैसे चूर हुए 
इस अवाम की विकल कराहें देखेगा जंतर मंतर

अन्न त्याग कर सोनम वांगचुक अपने रुख पर अड़े हुए 
जनाकांक्षा की हुंकारें देखेगा जंतर मंतर 

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर