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मोमिन ख़ां मोमिन की मशहूर ग़ज़ल- वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो

मोमिन ख़ाँ मोमिन
                
                                                         
                            वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
                                                                 
                            
वही या'नी वा'दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो

वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे बेशतर वो करम कि था मिरे हाल पर
मुझे सब है याद ज़रा ज़रा तुम्हें याद हो कि न याद हो
 

वो नए गिले वो शिकायतें वो मज़े मज़े की हिकायतें
वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो कि न याद हो

कभी बैठे सब में जो रू-ब-रू तो इशारतों ही से गुफ़्तुगू
वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो कि न याद हो
 
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3 वर्ष पहले

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