आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

माधव कौशिक:  निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है

उर्दू अदब
                
                                                         
                            निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफी है
                                                                 
                            
हवा का रुख बदलने के लिए चाहत ही काफी है।

ज़रूरत ही नहीं अहसास को अलफाज़ की कोई,
समुदर की तरह अहसास में शिद्दत ही काफी है।

मुबारक हों तुम्हें जीने के अंदाज़ शहरों में,
हमें तो गाँवों में मरने की बस राहत ही काफी है।

बड़े हथियार लिए जंग़ में शामिल हुए लोगों,
बुराई से निपटने के लिए क़ुदरत ही काफी है।

किसी दिलदार की दीवार क़िस्मत में नहीं तो क्या,
ये छप्पर, झोंपड़े, खपरैल की यह छत ही काफी है।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर